ज्योतिष शिक्षण माला भाग 003

ज्योतिष शिक्षण माला भाग 3

भारतीय ज्योतिष के अनुसार राशियों के गुण धर्म

 

मेष राशि

भौतिक लक्षण : मध्यम कद, पतला मांसल शरीर, लंबा चेरा और गर्दन, चौड़ा, मस्तक, सिर या कनपटी पर निशासन, सुदृढ़ दंतपक्ति, गोल आंखें, घुंघराले बाल।
अन्य गुण : उत्तम स्वभाव और आकर्षण।
सौभागशाली वर्ष : १६,२०,२८,३४,४१,४८,५१
कष्टप्रद वर्ष : १,३,६,८,१५,२१,३६,४०,४५,५६,६३
महत्वाकांक्षी, अग्रणी और उत्साही, अडिय़ल मगर स्पष्टवादी, व्यावहारिक, सौंदर्य, कला और सुरुचि प्रेमी। साहसिक, वाद-विवाद में रुचि, झगड़ालू। धार्मिक कट्टरपंथी, धैर्यहीन। जल से डर, भ्रमण प्रिय, प्रारंभिक जीवन में संघर्ष रहते हैं। योजना बनाने में निपुण, कार्यगति तीव्र, प्रशासन में सक्षम। दीर्घकालीन कार्यों में अरुचि। संकट का सामना करने की प्रतिभा परंतु दीर्घकालीन कष्टों से लडऩे में अक्षम। दूरदृष्टि, आदर्शवादी, उचित-अनुचित के मापदंडों का स्वयं निर्माता। लघु स्तर के कार्यों में अरुचि, विशालकाय उद्यमों से लगाव। उत्तम स्वभाव और आकर्षण, विपरीत लिंग के व्यक्ति प्रभावित होते हैं। जीवन का स्वयं निर्माता, कामी, प्रेम प्रसंगों में असफलत। ग्रह और परिवार से लगाव, सदा परिवारजनों के मध्य रहना पंसद करते हैं। घर को साफ-सुथरा रखते हैं। सरकार में उच्च पदों पर आसीन।
संभावित रोग : सिरदर्द, जलना, तीव्र ज्वर, पक्षाघात, मुंहासे, आधा-सीसी का दर्द, चेचक ओर स्नायविक व्याधियां। अधिक विश्राम और निद्रा, स्वादिष्ट भोजन और सब्जियों में रुचि।
रत्नों के रखने का स्थान, धातु, अग्रि, खनिज पदार्थ, लाल रंग, पाप राशि, मिलनसार, तुनुक मिजाज, झूठ बोलना, पृष्ठोदय, पुरुष राशि, कू्रर राशि, अग्रि तत्व, रजो गुण, दिनबली होती है।


वृष राशि

भौतिक लक्षण : मध्यम कद, प्राय: मोटा शरीर, चौड़ा मस्तक, मोटी गर्दन, सुंदर आकर्षक चेहरा, बड़े कान और आंखें, चौड़े कंधे, गठीला शरीर, गेहुंआ रंग, सफदे दांत, भारी जांघें, घुंघराले बाल, कमर या बगल में मस्सा।
अन्य गुण : प्रेमपूर्ण व्यवहार, सौंदर्य उपासक, संगीत और कला में रुचि। आरामपंसद, प्रेम, सुविधाओं और उत्तम भोजन में रुचि। उत्तम शारीरिक और मानसिक शक्ति।
अच्छे मित्र, स्पष्टवादी। निष्कर्ष निकालने से पूर्व भले-बुरे का अध्ययन। धन संचयी, खर्च में सावधान। आत्मनिर्भर, स्वयं की विशिष्ट कार्य प्रणाली और सिद्धांत। कूटनीतिक व्यवहार के कारण इनको समझना कठिन होता है। बारीकी के काम में महारत, स्मरण शक्ति उत्तम, प्रत्येक कार्य प्रसन्नतापूर्वक संपन्न करते हैं। उच्चकोटि के पदों पर कार्यरत, सुख-सुविधाओं की सामग्री जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, सौंदर्य प्रसाधन, बाग-बगीचे, इत्र, आभूषण आदि के व्यापार में रुचि। उत्तम अभिनेता, संगीतज्ञ, फिल्म निर्माता आदि होते हैं। कन्या विद्यालय या महिला क्लब में कार्यरत। भागयवान, आभूषणों और बागवानी पर धन व्यय करते हैं। विपरीत लिंग के व्यक्ति आकर्षित होते हैं, कन्या संतान अधिक होती है। विवाहित जीवन में तलाक बहुत कम होते हैं।
संभावित रोग : टॉन्सिल, डिप्थीरिया, पायरिया, जुकाम, कब्ज। जीवन में एक बार मतिभ्रम अवश्य होता है। ८ से १६ और ३६ से ४७ वर्ष की आयु में पारिवारिक समस्याओं के कारण मानसिक कष्ट होता है। उन्हें कठिनाइयों में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
कठिन वर्ष : १,२,८,३३,४४ और ६१
वन अथवा खेत, जहाँ पशु बांधे जाते हैं, जलपूर्ण खेत जहाँ धान पैदा होता है। शुभ राशि, स्त्री राशि, क्षमाशील, चौड़ी जांघें, बड़ा चेहरा, तुनुक मिज़ाज जब किसी बात पर क्रोधित हो जाए, व्यापारी वर्ग पृष्ठोदय तथा रात्रिबली होती है।


मिथुन राशि

भौतिक लक्षण : लंबा, सुड़ौल शरीर, पतले और लंबे हाथ, मध्यम रंग ठोढ़ी के पास गड्डा, सक्रिय, स्पष्ट वचन, तीखी-सक्रिय काली आंखें, लंबी नाक चेहरे पर मस्सा।
अन्य गुण : साहसी, मानव स्वभा का ज्ञान, सहानुभूतिपूर्ण और दयालू। ज्ञान, मौलिकता और चुस्ती में उत्तम, वक्त की नजाकत तुरंत भांप लेते हैं।
धोखाधड़ी के कारण हानि उठाते हैं। ईश्वर की सहायता उपलब्ध होती है। जरुरत के मुताबिक स्वयं को ढाल लेते हैं। परिवर्तनशील मिज़ाज, धैर्यहीन, बेचैन। मानसिक कार्यों में प्रवीण। संकल्पशक्ति कमजोर, निर्णयक्षमता तीव्र और एकाग्रता उत्तम होती है। यंत्र विज्ञान में प्रवीण होते हैं। प्रत्येक विषय की जानकारी रखते हैं। वार्तालाप में उत्कृष्ठ रहते हैं। प्रत्येक विषयकी जानकारी रखते हैं। वार्तालाप में उत्कृष्ट रहते हैं। कवि, वक्ता, लेखक, संगीतज्ञ आदि होते हैं। दो व्यवसाय भ्ज्ञी हो सकते हैं। दो कार्य-साथ-साथ सफलतापूर्वक संपन्न कर सकते हैं। नौकरी में किस्मत साथ नहीं देती है। समाज में सम्मान होता है। महिलाओं द्वारा कार्य में बाधा या हानि होती है। विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ सावधानी बरतनी चाहिए। धर्म और अध्यात्मक में रुचि होती है। महिलाएं इनकी कमजोरी होती हैं। उनका स्नेह पाने में प्रवीण होते हैं। सामाजिक उत्सवों आदि में भाग लेने के लिए तत्पर रहते हैं। विवाह में उत्साह और रुचि रहती है।
संभावित रोग : जुकाम, खांसी, यक्ष्मा, इंफ्लुएंजा। ३३ से ४६ वर्ष की आयु का समय इनके जीवन का स्वर्णकाल रहता है। ४७ से ५६ वर्ष में कष्ट रहते हैं। आयु के ६,२१ और ३२ वें वर्ष अशुभ होते हैं।
जहाँ नर्तक, संगीतकार, कलाकार वैश्याएं रहती हैं, उनका प्रतिनिधित्व करती है। शयनकक्ष, मनोरंजन करना, ताश खेलना आदि स्थानों की स्वामी हैं। यह उभयोदय राशि, घुंघराले बाल, काले ओष्ठ, अन्य व्यक्तियों को समझने में चतुर, उन्नत नाक, संगीत में रुचि, गृह कार्य में रुचि, पतली, लम्बी उंगलियां मध्य दिन में बली रहती हैं। पुरुष राशि हैं।


कर्क राशि

भौतिक लक्षण : छोटा कद, बौनापन, शरीर का ऊपरी भाग बड़ा, बचपन में दुबला शरीर, सुदृढ़ पुरुषत्व, गोल चेहरा, चेहरे पर भय की छाया, पीला-फीका रंग भूरे बाल, लहराई सी चाल, चौड़े दांत, चौड़े कंधे, सीधे नहीं चलते हैं।
अन्य गुण : कल्पनाशिक्त उत्तम, नकल उतारने में महारत, कई अभिनेता और नकलची इस राशि के होते हैं।
नये विचारों को शीघ्र अपना लेते हैं, नये वातावरण में शीघ्र ढल जाते हैं। परिश्रम द्वारा धन संचय करते हैं। परिवर्तनशील प्रकृति के कार्य कर सकते हैं। व्यापार विशेषकर खान-पान के कार्य में निपुण होते हैं। अच्छे नेता, वक्ता, लेखक, सलाहकार होते हैं। क्रोधी और धैर्यहीन हाते हैं। मूड बदलता रहता है। भरोसंमंद नहीं होते। बातूनी, आत्मनिर्भर, ईमानदार और न झुकने वाले होते हैं। न्यायप्रिय होते हैं। स्मरणशक्ति उत्तम होती है। अच्छे मेहमानवाज होते हैं। विद्वानों के प्रिय होते हैं। परिवार और संतान में आसक्त रहते हैं। आदर्श जीवन साथ साबित होते हैं। प्राय: महिलाओं के चक्कर में रहते हैं। बेचैन और भटकते रहते हैं।
संभावित रोग : फेफड़ों का संक्रमण, खांसी, यक्ष्मा, अजीर्ण, अफरा, स्नायनिक दुर्बलता, पीलिया आदि। २१ से ३६ वर्ष की आयु का समय सौभागयशाली होता है। ३७ से ५२ वर्ष में आर्थिक कठिनाइयां और शत्रुओं से कष्ट होते हैं। ५२ से ६३ वर्ष का समय अति उत्तम रहता है। अशुभ वर्ष ५,२५ ४० ४८ और ६२।
जलीय खेत जहाँ धान पैदा होता है। कुएं, तालाब, नदी के किनारे जहां पौधों की अधिकता होती है, आदि स्थानों में इनकी उपस्थिति पायी जाती है। चलने में तेज, धन का शौकीन, शुभ राशि, मिलनसार, प्रकृति, नि:स्वार्थ, दूसरों के लिए बलिदान देने वाला जातक होता है। स्त्री राशि हैं।


सिंह राशि

भौतिक लक्षण : अच्छा कद, चौड़े कंधे, सुदृढ़ शरीर, प्रभावशाली व्यक्तित्व अंडाकार चेहरा, शरीर का ऊपरी भाग सुडौल, पतली कमर, नीली या पीली आंखें।
अन्य गुण : प्रभुत्वशाली, मुखर, ताकतवर, प्रशासन में सक्षम। स्पष्टवादी, दयालु, क्षमाशील, महत्वाकांक्षी, संकल्पशील। पठन-पाठन के शौकीन होते हैं। आय सीमित होने पर भी शान से जीते हैं। लोगों में आत्मविश्वास जागृत करने में निपुण होते हैं।
चाटुकारी से अप्रसन्न होते हैं। मुख्य गुण हैं इनका शांत स्वभाव। पूर्व दिशा की यात्रा और पूर्व दिशा की आरे मुख करके कार्य करना लाभ कारी रहता है। आत्मविश्वास और वस्तुओं का संग्रह इनकी सफलता के मूलाधार हैं। आत्मविश्वास और धैर्य के बल पर कठिन कार्य में भी सफल होते हैं। अवसर का लाभ उठाने से चूकते हैं। नाटक, कविता और कलाओं में रुचि होती है। राजा और परिवार के लिए वफादार रहते हैं। सट्टेबाजी में रुचि होती है। सरकारी नौकरी, पुलिस और सेना में सफल रहते हैं। किसी एक क्षेत्र में महारत हासिल करते हैं। व्यक्तित्व आकर्षक होता है, विपरीत लिंग के व्यक्ति आकर्षित होते हैं। काम-वासना का आधिक्य रहता है, मांसाहारी भोजन पंसद करते हैं। दूरस्थ स्थान, पर्वत आदि में घूमने के शौकीन होते हैं, ढंडे स्थानों से बचाव करते हैं।
संभावित रोग : शोथ, लू लगना, मिर्गी, ज्वर, तानिका शोथ (मैंनिंजाइटिस), हृदय रोग आदि।
१९ से ३६ वर्ष की आयु का समय उत्तम होता है। ३७ से ४२ वर्ष कष्टप्रद होते हैं। ४६ से ६२ वर्ष के समय में स्वास्थ्य समस्याएं, परेशानियां, मुकदमे रहते हैं। २१, २८ और ३५ वें वर्ष सौभागयशाली होते हैं। ६६वें वर्ष में दुर्घटना की संभावना होती है। ५,१३,२८ और ४८वें वर्ष अशुभ होते हैं।
वनों के स्थान, पर्वत, टीले, किले, दिनबली, शीर्षोदय, निवास-गुफाएं, लम्बे गाल, चौड़ा चेहरा कू्रर राशि, पुरुष राशि, दिनबली होती है।


कन्या राशि

भौतिक लक्षण : मध्यम कद, काले बाल और आंख, त्वरित चुरसत चाल, वास्तविक आयु से कम के प्रतीत होते हैं, विकसित छाती, सीधी नाक, पतली और तीखी आवाज, धनुषाकार घनी भौंहें, गर्दन या जांघों पर निशान।
अन्य गुण : बहुत बुद्धिमान, विश्लेषक, विलक्षण बुद्धि वाला अन्य की भावनाओं और त्रुटियों का निंदक। भाषाओं के ज्ञानी होते हैं और किसी प्रक्रिया को समझने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उपयोग करते हैं। भावनाओं में बह जाते हैं।
सोच समझ कर निर्णय लेते हैं। आत्मविश्वास की कमी, घबराये से रहते हैं। सुव्यवस्थित अपने विचार की बारीकियों को समझने में सक्षम होते हैं। स्वयं के स्वार्थ के प्रति जागरुक, मितव्ययी, कूटतीतिज्ञ, चतुर होते हैं। गृहसज्जा में निपुण, गणितज्ञ, पराविद्या मेें रुचि होती है।
उदर रोगों से सावधान रहना चाहिए। पेचिश, टायफायड, पथरी आदि संभाव्य रोग हैं। विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन सुखी, संतान कम होती है। आय, उत्तम, कार्य-व्यवसाय में सफलता, संपत्ति के मालिक होते हैं। नाममात्र की व्याधि होने पर भी डॉक्टर के पास चले जाते हैं। पृथ्वी तत्व की राशि होने के कारण बागवानी और खेती में रुचि लेते हैं। धन संचय में रुचि होती है।
२० से २५ वर्ष की आयु में सफल और साहसी होते हैं। २५ से ३५ वर्ष की आयु में स्वयं का मकान होता है। ३६ से ४८ वर्ष कष्टप्रद होते हैं। ४९ से ६२ वर्ष सौभागयशाली होते हैं, अचानक लाभ होता है। २३ और २४वें बहुत उत्तम होते हैं जबकि ४,१६,२२,३६ और ५५वें वर्ष कष्टप्रद होते हैं। जीवन के अंतिम चरण टी.बी. हो सकती है।
स्त्री राशि, मनोरंजन के स्थान, चारागाह, शुभ राशि, मध्यम कद, शीर्षोदय राशि, पौधों वाली भूमि, कन्धों तथा भुजाओं का झुकना, सच्चा, दयालुता, काले बाल, अच्छी मानसिक योगयता, विधि अनुसार कार्य करने वाली तर्कशील होती है।


तुला राशि

भौतिक लक्षण : लंबा-पतला, सुदृढ़-सुडौल शरीर, सुंदर चेहरा, लावण्यमयी त्वचा, मध्यायु में गंजापन हो जाता है, भौहें सुंदरता मेें वृद्धि करती हैं। नाक थोड़ी मुड़ी हुई (तोते जैसी) होती है, दांतों के मध्य में खाली जगह होती है, मस्तक उठा हुआ होता है।
अन्य गुण : नम्र, दयालु, ईमानदार, न्याय करने में निपुण, निर्णय लेने से पूर्व हर पहलू का विश्लेषण करते हैं। दूसरों के धन के लोलुप होते हैं मगर आश्रितों के सहायक रहते हैं। भावुक मगर लचीले स्वभाव के होते हैं। क्रोध शीघ्र हो जाता है। स्वयं की बजाय दूसरों का अधिक ध्यान रखते हैं। वाद-विवाद में पटु होते हैं। सदा न्याय, शांति, प्रेम का समर्थन करते हैं। तुला वायु तत्त्व की राशि होने के कारण सदा सुंदरता और प्रकृति के प्रेमी होते हैं। पर्यटन के शौकीन होते हैं, इस कारण आवास में भी परिवर्तन कर लेते हैं। उच्चकोटि का जीवन यापन करते हैं। वेशभूषा, फर्नीचर, वाहन और अन्य सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। व्यापार में कुशल होते हैं। अधिकंाशत: लोकप्रिय होते हैं, व्यापार में अच्छे साझेदार साबित होते हैं। उत्तम सेल्समैन, लाएसां अधिकारी और रिसेप्शनिस्ट बनते ैं। कलाप्रेमी होते हैं और महिलाओं के मध्य विचरना पसंद करते हैं। सौभागयशाली महिलाएं इन्हें पसंद करती है।
संभावित रोग : गुर्दों के रोग, मेरुदुड में दर्द, संक्रामक रोग। महिलाओं में गर्भाशय के रोग होते हैं। १८ से २७ वर्ष की आयु में बहुत प्रगति करते हैं, २८ से ४२ वर्ष के मध्य उत्तम धनार्जन होता है। ८,१५,३५,६२ और ६४ अशुभ वर्ष हैं।
व्यापारी, दुकान, अनाज का स्थान, व्यापारी का घर, वर्ण काला, मध्यम कद, शीर्षोदय, व्यापारिक स्थान जवानी में पतला शरीर परन्तु मोटापे की ओर झुकाव, गोल चेहरा, पुरुष राशि की होती है।


वृश्चिक राशि

भौतिक लक्षण : मध्यम कद, सुडौल शरीर ओर अंग, चौड़ा चेहरा, घुंघराले बाल, श्याम वर्ण, उन्नत ठोड़ी।
अन्य गुण : स्पष्टवादी, निडर, रुखा व्यावहार। उत्तमत मस्तिष्क, बुद्धिमान, ईच्छाशक्ति से युक्त। शब्दों का उत्तम चुनाव करते हैं। अन्य लोगों के मामलों में दखल नहीं देते हैं। अक्सर तानाशाह होते हैं, कभी थकान नहीं होती।
जब तक आश्वस्त न हो जाएं कि उनका विषय का ज्ञान सर्वोच्च कोटि का है, मुंह नहीं खोलते। वार्तालाप और लेखन में दक्ष होते हैं, अपने बुद्धिबल के सहारे रहते हैं। उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता और आत्मविश्वास से युक्त होते हैं। गुप्त रूप से अपराध करने में सक्षम होते हैं। परिश्रम और साहस के बल पर धनार्जन करते हैं। स्वयं के बल पर सफल होते हें। सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय होते हैं। समाज में सलाहकार/नेता बनते हैं। सेना औरा पुलिस में सफलतापूर्वक कार्य करते हैं। इनके बहुत से शत्रु होते हैं। मौलिक अनुसंधान में चतुर होते हैं। अकेले रहकर बेहरतर कार्य करते हैं। मैदान के खेलों के शौकीन होते हैं। संगीत, कला, नृत्य आदि में प्रवीण होते हें। पराविद्या में रुचि होती है। काम-वासना अधिक होती है, साथी को पशु की तरह प्रयोग करते हैं।
संभावित रोग : गुप्त रोग, प्रोस्टेट ग्रंथि, पित्ताशय आदि के रोग, आयु के २९ से ४५ वर्ष सौभागयशाली होते हैं। ६२ से ७१ वर्ष की आयु में गंभीर व्याधि होती है या ऑपरेशन होता है।
अशुभ वर्ष : ११,२८,३८,५२,६२
छेद या बिल वाला स्थान, विष, शीर्षोदय राशि, चौड़ी फैली हुई आंखें तथा छाती। बाल्यावस्था में बीमार, कू्रर कार्मों में रुचि, साहसी, सहनशक्ति, प्रबन्धक, स्त्री राशि होती है।


धनु राशि

भौतिक लक्षण : सुदंर, सुविकसित आकृति, बादामी आंखें, भूरे बाल, धनी और ऊँची भौंहें, लंबा चेहरा, लंबी नाक, सुंदर आकृति, चाल सीधी नहीं होती है। मोटे होंठ, नाक, कान और दांत।
अन्य गुण : स्वतंत्र, दयालु, ईमानदार, भरोसेमंद, ईश्वर भक्त। चौकन्ने, अतीन्द्रिय ज्ञानयुक्त, बात की तरह तक शीघ्र पहुंच जाते है। आंखे कमजोर हो सकती हैं, कुबड़ापन संभव है। न्यायप्रिय, स्पष्टवादी, परंपरावादी, व्यावसायिक दृष्टिकोण।
कभी-कभी बैचेन और चिंतत हो जाते हैं। दोहरी मानसिकता, हरफनमौला, प्रत्येक विषय सीखने को ईच्छुक, प्रसन्नचित रहते हैं। कानून का पालन करने वाले, अदालतों से दूर रहते हैं। सादे जीवन से प्रसन्न, समय के अनुसार अपने को ढाल लेते हैं। कला और काव्य के प्रेमी, सर्जनात्मक प्रतिभा के धनी। कानून का पालन करते हैं, अदालत के पचड़ों से दूर रहते हैं। पराविद्या और दर्शनशास्त्र में रुचि होती है।
खानपान और सेक्स में संयम बरतते हैं। कार्य में सफाई, सुव्यवस्था, क्रमबद्धता, अनुशासन और परिश्रम द्वारा सफलता प्राप्त करते हैं। आत्मविश्वास उत्तम होता है। हाथ के कार्य को अधूरा नहीं छोड़ते हैं। सरकार से सहयोग मिलता है, विरासत में जायदाद प्राप्त करते हैं।
संभावित रोग : साइटिका, गठिया का दर्द, कूल्हे की हड्डी टूटना, गाउट, फेफड़ों की व्याधि आदि। अध्यापक, वक्ता, धर्मगुरु, न्यायाधीश, वकील आदि कार्यों में सफल होते हैं। १८ से ३७ वर्ष की आयु के मध्य आर्थिक स्थिति उत्तम होती है। ३८ से ४७ वर्ष में घरेलू कष्ट रहता है। ६१ से ६९ वर्ष के दौरान संपन्नता रहती है।
अशुभ वर्ष : २,१०,१८,३१,३८ एवं ४२
वह स्थान जहां घोड़े, हाथ या रथ (मोटर कार) रखे जाते हैं। राजा का निवास, पाप राशि, पुरुष राशि, दिनबली, पृष्ठोदय, लम्बे चेहरा और गर्दन, कान तथा नाक बड़े, अतयधिक उदार अच्छे दिल वाला, भौतिक संस्कृति को पंसद करने वाला, यात्रा-पंसद, ऊँची आवाज आदि लक्षण के होते हैं।


मकर राशि

भौतिक लक्षण : दुबला-पतला शरीर, उम्र के साथ स्वास्थ्य सुधरता है, बड़े दांत, बड़ा मुख, नाक विशिष्ट रहती है, बाल काले और मोटे होते हैं, चेहरा पतला और अंडाकार, कुबड़ी मकर, घुटनों पर मस्सा या निशान, मगरमच्छ के समान जबड़े, लघु मस्तक, दाढ़ी में बाल कम रहते हैं।
अन्य गुणधर्म : मितव्ययी, विचारशील, उत्तम विवेकशक्ति, सत्ताप्रेमी, आत्मनिर्भर, बुद्धिजीवी।
किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिलने तक निराश ही रहते हैं। सांसारिक कार्यों में तथ्यों और आंकड़ों का प्रयोग करते हैं। ईमानदार और निष्कपट होते हैं। शक्ति के आगे अडिग रहते हैं परंतु सज्जनता और मित्रता के सामने नतमस्तक हो जाते हैं। संगठन क्षमता उत्तम होती है। कठिनाई में भी किसी से सहायता के लिए नहीं कहते हैं। वाकशक्ति में बांधाएं रहती हैं। उच्च और सामाजिक पदों के लिए उपयुक्त होते हैं। तकनीकी और वित्तीय कार्यों में सफल होते हैं। नवागंतुकों के साथ मित्रता में शिथिल रहते हैं पर पुराने मित्रों से अच्छे संबंध होते हैं।
प्रेम प्रसंग में रुचि कम होती है पर परिवार और प्रियजनों की उत्तम देखभाल करते हैं। विपरीत लिंग के व्यक्तियों से बातचीत में शिथिल और सावधान रहते हैं। स्वयं से वरिष्ठ आयु के विपरीत लिंग व्यक्तियों से संबंध स्थापित करते हैं।
संभावित रोग : घुटनों में चोट, त्वचा रोग, खरोंच, हड्डी टूटना, गठिया, पित्ती आदि। बाल्यावस्था में अग्रि, हथियार या लोहे से चोट की आशंका रहती है।
३३ से ४९ वर्ष की आयु में जीवन आनंदप्रद रहता है। ५०-५१ वर्ष में स्वास्थ्य कष्ट होता है।
अशुभ वर्ष : ५,१३,२७,३६,५७,६२ और ६७
जलीय स्थान, बहुत मात्रा में पानी वाले स्थान, नदी के किनारे, पृष्ठोदय राशि, स्त्री राशि, नीचले अंगों में कमजोरी, बलवान होते हैं।


कुंभ राशि

भौतिक लक्षण : मध्यम कद, हस्ट-पुष्ट, चेहरा सुंदर और गोल, गाल भरे हुए कनपटियां और जांघें विकसित होती हैं। गोरा रंग, भूरे बाल, असुंदर दांत, पिंडलियों में मस्सा, शरीर पर घने बाल हाथ और पैर मोटे, नसें विकसित होती है।
अन्य गुण : मानवीय दृष्टिकोण और प्रगतिशील जीवन और उसकी समस्याओं के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण रखते हैं।
संकोची होते हैं, निर्णय लेने से पूर्व पूर्ण नापतौल करते हैं या अन्य लोगों द्वारा कार्यारंभ करने तक प्रतीक्षा करते हैं। सदा सतक्रता, धैर्य, एकाग्रता, अध्ययनशीलता से युक्त रहते हैं। वार्तालाप रूचिकर होता है। स्पष्टवादी, सबके प्रिय होते हैं। दयालु, अध्ययन प्रेमी और सज्जन होते हैं। प्रकृतिप्रेमी हाते हैं। मित्रता निभाते हैं, रुचि-अरुचि तीव्र होती है। एकांतप्रिय होते हैं। अतीन्द्रिय शक्ति से युक्त होते हैं, ध्यान-साधना में रुचि होती है। स्मरणशक्ति तीव्र, दृष्टिकोण वैज्ञानिक होता है।
गरीबों के सेवक होते हैं। नवीन तकनीक और मशीनरी, अनुसंधान, निवेश आदि द्वारा धनार्जन करते हैं। तकनीकी शिक्षा में रुचि होती है। परिवार से लगाव होता है। जीवनसाथी के चुनाव में आयु को अनदेखी कर बुद्धि और शिक्षा में समानता पर जोर देते हैं। गृह सुसज्जित होता है जिसमें आधुनिक ढंग से पुरातात्त्विक सामग्री एकत्रित रहती है। अपने प्रेम को अभिव्यक्त नहीं करते। अगर इनका प्रेमी वासनाप्रिय हो तो वह असंतुष्ट होता है। क्योंकि कुंभ राशि के व्यक्ति शीतल होते हैं।
संभावित रोग : संक्रामक रोग, दंत व्याधि, टॉन्सिल आदि, २२ से ४० वर्ष की आयु में संपन्नता रहती है। ४१ से ४३ वर्ष में हथियार, लोहे या काष्ठ से चोट की आशंका रहती है। ४४ से ६७ वर्ष भागयशाली होते हैं। ६८ वर्ष से बाद का समय अशुभ होता है।
अशुभ वर्ष : ३३,४८,६४
वे स्थान जहाँ पानी सूख जाता है, जहाँ शराब बनती है, जहाँ पक्षी रहते हैं और जहाँ घड़े रखे जाते हैं। पाप राशि, दिनबली, शीर्षोदय, देखने में सुंदर, प्रतिभावान, क्षमाशील स्वभाव का होता है। पुरुष राशि है।


मीन राशि

भौतिक लक्षण : नाटा और मोटा शरीर, हाथ – पांव काफी छोटे होते हैं। केश मुलायम, गोरा रंग, चेहरा कांतियुक्त होता है। सुंदर और आकर्षक, आंखे बड़ी-बड़ी, मजबूत गोलाकार कंधे, ठोड़ी में गड्डा होता है।
अन्य गुणधर्म : आकृति अप्रभावशाली होती है, बेचैन रहते हैं, कल्पनाशील और रोमांटिक होते हैं। ईमानदार और मानवीय, कभी शांत तो कभी क्रोधी, अन्यों की राय से प्रभावित रहते हैं, आत्म विश्वास में कमी होती है।
अत्यधिक सहानुभूतिपूर्ण, क्षमाशील, दयालु और भरोसेमंद होते हैं। स्वयं की योगयता को पहचानते हैं जिसकी वजह से प्रगति में बाधा रती है। परंपरावादी, अत्यधिक अंधविश्वासी, अकेले रहनेव ाले, ईश्वरभक्त, पक्के धार्मिक कर्मकांडी होते हैं। जंतुओं के कष्ट को भी नहीं देख सकते हैं और सहायता प्रदान करते हैं। महत्वाकांक्षाओं की कमी रहती है, भौतिक जगत में प्रगति धीमी रहती है। दो व्यवसाय साथ-साथ्ज्ञ हो सकते हैं, नये कार्य में भी शीघ्र दक्ष हो जाते हैं। अच्छे कर्मचारी साबित होते हैं। द्रव पदार्थों के व्यापार में सफल होते हैं, आयात-निर्यात में लाभ होता है। उदर रोग, घुटनों और पैरों की चोट संभाव्य होती हैं।
घरेलू एवं व्यावसायिक जीवन आनंदमय होता है। जीवनसाथी की सुंदरता, ज्ञान और ललित कलाओं को प्राथमिकता देते हैं। प्राय: दो विवाह हो सकते हैं, जीवन साथ्ज्ञ का प्रभाव प्रबल रहता है।
२७ से ४३ वर्ष की आयु में संपन्नता रहती है। ४४ से ६० वर्ष कष्टप्रद रहते हैं। ६१ से ६९ वर्ष भागयशाली रहते हैं।
अशुभ वर्ष : ८,१३,३६ और ४८
धार्मिक, पवित्र स्थान, पवित्र नदियों का स्थान, मंदिर, तीर्थ स्थान, समुद्र आदि, कद छोटा, उभयोदय, सुगठित शरीर, पत्नी को चाहने वाला, शिक्षित विद्वान, कम बोलने वाला होता है। स्त्री राशि है।

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