रमल द्वारा जातक के मन में छिपे प्रश्न का संज्ञान

ramal astrologer

रमल एक प्राचीन भारतीय शास्त्र है, जिसके द्वारा प्रश्नों के उत्तर व उसके समाधान प्राप्त किये जा सकते है। साथ ही इस चमत्कारिक शास्त्र से मूक प्रश्नों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है, जो जातक प्रत्यक्ष रूप से नहीं पूछ रहा परन्तु उसके मन में चिन्ता का कारण बने हुये है।

(1) सर्वप्रथम रमल के पाँसों को डालकर 16 भाव की प्रश्न कुण्डली (प्रस्तार) का निर्माण करें। फिर उसमें से पहली और तेरहवीं शक्लों के गुणन से प्राप्त शक्ल को देखें। यदि वह शक्ल प्रस्तार में कहीं भी पड़ी हो तो प्रच्छक किसी दूसरे के लिए कथन कर रहा है- यह समझना चाहिए।

साथ ही प्राप्त शक्ल शकुन पंकित क्रम या उपरोक्त चित्रानुसार जिस घर की हो, उसी घर से सम्बन्धित प्रश्न कहना चाहिए।

(2) रमल पाँसों द्वारा प्राप्त कुण्डली या प्रस्तार तैयार करके पहले घर से सोलहवें घर तक की शक्लों के शून्यों के योग में 16 का भाग देने से जो शेष बचे, उसी संख्या वाले घर से सम्बन्धित प्रश्न समझना चाहिए।

यदि शेष 13, 14, 15, या 16 बचें तो उसे स्वविवेक से 13 के लिये 1, 5 व 9 घर से जुड़ता प्रश्न जानें, 14 के लिये 2,6,10 घर से जुड़ा प्रश्न हो सकता है, 15 के लिये 3,7,11 भाव से सम्बन्धित प्रश्न जाने और 16 के लिये 4,8,12 भाव से सम्बन्धित प्रश्न कहना चाहिए।

(3) रमल के पाँसों द्वारा प्राप्त प्रस्तार की नवीं, दसवीं, ग्यारहवीं तथा बारहवीं शक्लों के अग्नि तत्त्व से अर्थात सबसे उपरी पक्ति से एक शक्ल का निर्माण करें। पन्द्रहवाँ तेरहवीं, नवीं, और पहली- इन चारों शक्लों के पृथ्वी तत्त्व (नीचे का अन्तिम भाग) लेकर एक शक्ल बनायें तथा पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी इन शक्लों के अग्रि तत्व द्वारा अर्थात सबसे उपरी पक्ति से एक शक्ल का निर्माण करें। और आठवीं और बारहवीं शक्ल का वायु तत्त्व, चौदहवीं शक्ल का जल तत्त्व तथा सोलहवीं शक्ल का अग्रि तत्त्व लेकर चौथी शक्ल बनायें।

तदुपरान्त इन चारों शक्लों से  २ तथा उन दो से १ शक्ल बनायें। वह एक शक्ल प्रस्तार के जिस घर में पड़ी हो, उसी घर से सम्बन्धित प्रश्न कहना चाहिए।

यदि शेष 13, 14, 15, या 16 बचें तो उसे स्वविवेक से 13 के लिये 1, 5 व 9 घर से जुड़ता प्रश्न जानें, 14 के लिये 2,6,10 घर से जुड़ा प्रश्न हो सकता है, 15 के लिये 3,7,11 भाव से सम्बन्धित प्रश्न जाने और 16 के लिये 4,8,12 भाव से सम्बन्धित प्रश्न कहना चाहिए।

यदि वह शक्ल प्रस्तार के किसी भी घर में न पड़ी हो तो शक्ल अबदह पंक्तिक्रम के जिस घर की हो, उसी से सम्बन्धित प्रश्न कहना चाहिए।

नोट : प्रस्तार के पन्द्रहवें घर में हमेशा दो शून्य वाली शक्ल रहती है परन्तु कभी-कभी उसमें चार रेखाएँ तथा चार शून्य भी आ जाती हैं। एक अथवा तीन शून्य वाली शक्ल कभी भी नहीं आती। यदि ऐसी शक्लें आ जाय तो प्रस्तार को अशुद्ध समझना चाहिए।

1 Comment

  1. Chandan kumar says:

    Very nice guruji; kya ramal se yah jana ja sakta hai ki koi chiz kab sasti ya mahangi hogi

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